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  • राज्यपाल ने शिक्षा क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वालों को सम्मानित किया। शिक्षा व्यवसाय नहीं है, पवित्र कार्य है – राज्यपाल

    राज्यपाल ने शिक्षा क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वालों को सम्मानित किया। शिक्षा व्यवसाय नहीं है, पवित्र कार्य है – राज्यपाल

    जयपुर, 21 अप्रैल। राज्यपाल श्री हरिभाऊ बागडे ने सोमवार को छत्रपति संभाजी नगर में आयोजित एक समारोह में शिक्षा क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वाले शिक्षकों और शिक्षण संस्थाओं का सम्मान और अभिनंदन किया।

    श्री बागडे ने इस दौरान भारत के प्राचीन तक्षशिला, नालंदा, विक्रम विश्वविद्यालय आदि की चर्चा करते हुए कहा कि शैक्षिक क्षेत्र में आरम्भ से ही भारत विश्व भर में अग्रणी रहा है।

    राज्यपाल ने कहा कि शिक्षा व्यवसाय नहीं बल्कि पवित्र कार्य है। शिक्षा प्रदान करना सबसे बड़ा पुण्य का कार्य है। उन्होंने शिक्षण संस्थाओं का आह्वान किया कि वे गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करते हुए राष्ट्र को विश्व भर में अग्रणी बनाने का कार्य करे।

    उन्होंने आर्यभट्ट, पाणिनि, भास्कराचार्य आदि की चर्चा करते हुए कहा कि उन्होंने वैज्ञानिक और जीवन व्यवहार, भाषा के जो सूत्र प्रदान किए, उसी को बाद में आधुनिक रूप में  पश्चिम के देशों ने प्रस्तुत किया।

    उन्होंने शिक्षण संस्थानों में बौद्धिक क्षमता विकास के साथ भारतीय ज्ञान परंपरा के संबंध में नई पीढ़ी को जागरुक किए जाने का आह्वान किया। राज्यपाल ने कहा कि विश्व को सबसे पहले जीरो का ज्ञान भारत ने दिया इसी से अन्य देशों में गिनती की शुरुआत हुई।

  • राजस्थान में विभिन्न छात्रवृत्ति योजनाओं की जानकारी एक जगह

    राजस्थान में विभिन्न छात्रवृत्ति योजनाओं की जानकारी एक जगह

    राजस्थान सरकार छात्रों को उच्च शिक्षा और उनके शैक्षणिक विकास के लिए विभिन्न छात्रवृत्ति योजनाएं संचालित करती है। इन योजनाओं का उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर, मेधावी, और विशेष रूप से बालिकाओं को शिक्षा के क्षेत्र में प्रोत्साहित करना है। नीचे कुछ प्रमुख छात्रवृत्ति योजनाओं की जानकारी दी गई है:

    1. मुख्यमंत्री उच्च शिक्षा छात्रवृत्ति योजना (Mukhyamantri Uchch Shiksha Chhatravritti Yojana)

    यह योजना आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के छात्रों को उच्च शिक्षा प्राप्त करने के लिए वित्तीय सहायता प्रदान करती है। जिन छात्रों ने 12वीं कक्षा में 60% या उससे अधिक अंक प्राप्त किए हैं और स्नातक या स्नातकोत्तर पाठ्यक्रमों में नियमित रूप से अध्ययन कर रहे हैं, वे इस योजना के पात्र हैं। इस योजना के तहत, छात्रों को प्रति वर्ष ₹5,000 की छात्रवृत्ति दी जाती है, जबकि दिव्यांग छात्रों को प्रति वर्ष ₹10,000 की सहायता मिलती है। आवेदन प्रक्रिया और आवश्यक दस्तावेजों की जानकारी के लिए यहां देखें।

    2. गार्गी पुरस्कार योजना

    इस योजना का उद्देश्य मेधावी बालिकाओं को प्रोत्साहित करना है। 10वीं कक्षा में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाली बालिकाओं को 11वीं कक्षा में प्रवेश लेने पर ₹3,000 और 12वीं कक्षा में विज्ञान, वाणिज्य या कृषि संकाय में अध्ययन करने पर ₹5,000 की प्रोत्साहन राशि दी जाती है।

    3. इंदिरा प्रियदर्शिनी पुरस्कार योजना (Indira Scholarship Scheme)

    यह योजना ग्रामीण क्षेत्रों की मेधावी बालिकाओं को प्रोत्साहन देने के लिए शुरू की गई है। 10वीं कक्षा में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाली ग्रामीण बालिकाओं को इस योजना के तहत वित्तीय सहायता प्रदान की जाती है।

    4. आपकी बेटी योजना

    इस योजना के तहत, सरकारी विद्यालयों में अध्ययनरत कक्षा 1 से 12 तक की बालिकाओं को वार्षिक वित्तीय सहायता दी जाती है। इसका उद्देश्य बालिकाओं की शिक्षा को बढ़ावा देना और उन्हें स्कूल में बनाए रखना है।

    5. बालिका शिक्षा प्रोत्साहन योजना

    यह योजना अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति की बालिकाओं को कक्षा 1 से 12 तक की शिक्षा के लिए प्रोत्साहित करने हेतु वित्तीय सहायता प्रदान करती है।

    6. साइकिल वितरण योजना

    राजस्थान सरकार दूरस्थ क्षेत्रों में रहने वाली बालिकाओं को विद्यालय तक पहुंचने में सहायता करने के लिए साइकिलें वितरित करती है, ताकि उनकी शिक्षा में बाधा न आए।

    7. कस्तूरबा गांधी छात्रवृत्ति योजना

    यह योजना अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग की बालिकाओं को कक्षा 6 से 12 तक की शिक्षा के लिए वित्तीय सहायता प्रदान करती है।

    8. ट्रांसपोर्ट वाउचर योजना

    इस योजना के तहत, दूरस्थ क्षेत्रों में रहने वाले छात्रों को विद्यालय तक पहुंचने के लिए परिवहन वाउचर प्रदान किए जाते हैं, जिससे उनकी शिक्षा में निरंतरता बनी रहे।

    9. इंस्पायर अवॉर्ड योजना

    यह योजना विज्ञान और प्रौद्योगिकी में रुचि रखने वाले मेधावी छात्रों को प्रोत्साहित करने के लिए वित्तीय सहायता और पुरस्कार प्रदान करती है।

    इन योजनाओं के माध्यम से, राजस्थान सरकार छात्रों को उनकी शिक्षा में सहायता प्रदान कर रही है। आवेदन प्रक्रिया, पात्रता मानदंड और आवश्यक दस्तावेजों की जानकारी के लिए संबंधित योजना की आधिकारिक वेबसाइट या निकटतम शिक्षा विभाग कार्यालय से संपर्क करें।

  • शिक्षाविद जयश्री पेरीवाल दिल्ली में सम्मानित

    शिक्षाविद जयश्री पेरीवाल दिल्ली में सम्मानित

    जयपुर शहर के जाने माने स्कूल जे पी एच एस (स्टेप बाय स्टेप) की चेयरपर्सन, मशहूर शिक्षाविद डॉ. जयश्री पेरीवाल को नई दिल्ली में “ए लीजेंड इन एजुकेशन” पुरस्कार से सम्मानित किया गया। इस अवसर पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए स्कूल की प्रिसिपल श्रीमती मधु मैनी ने कहा, “डॉक्टर पेरिवाल; हमारी चेयरपर्सन को एक और राष्ट्रीय सम्मान मिलना हम सभी के लिए गर्व का क्षण है, वे दूरदर्शी और परिश्रमी है”

  • सुरक्षित स्कूल, सुरक्षित राजस्थान: तीसरे चरण में 45.55 लाख बच्चों ने ‘गुड टच-बैड टच’ का पाठ दोहराया, ‘नो-गो-टेल’ थ्योरी से बच्चों ने सीखे असुरक्षित स्पर्श से बचाव के गुर

    सुरक्षित स्कूल, सुरक्षित राजस्थान: तीसरे चरण में 45.55 लाख बच्चों ने ‘गुड टच-बैड टच’ का पाठ दोहराया, ‘नो-गो-टेल’ थ्योरी से बच्चों ने सीखे असुरक्षित स्पर्श से बचाव के गुर

    जयपुर, 03 फरवरी। प्रदेश के सरकारी स्कूलों में अध्ययनरत बच्चों में ‘असुरक्षित स्पर्श’ के प्रति जागरूकता से समाज में ‘चाइल्ड अब्यूज’ की घटनाओं पर लगाम कसने के लिए ‘सुरक्षित स्कूल सुरक्षित राजस्थान’ अभियान का तीसरा और अंतिम चरण शनिवार को ‘नो बैग डे’ एक्टिविटी के तहत आयोजित किया गया। स्कूल शिक्षा विभाग के शासन सचिव श्री नवीन जैन ने बताया कि शिक्षा मंत्री श्री मदन दिलावर ने स्कूलों में विद्यार्थियों के साथ यौन दुराचार की घटनाओं पर चिंता व्यक्त करते हुए दोषी लोगों के विरूद्ध सख्त एक्शन की हिदायत दी है। स्कूल शिक्षा विभाग का यह आयोजन ऐसी घटनाओं की रोकथाम में मददगार साबित होगा।

    उन्होंने बताया कि ‘सुरक्षित स्कूल सुरक्षित राजस्थान अभियान के तीसरे चरण में राज्य के 65 हजार से अधिक सरकारी स्कूलों में एक साथ आयोजित इस गतिविधि में 45 लाख 55 हजार 358 विद्यार्थियों के लिए एक लाख 3 हजार 920 रिपीटिशन सत्र आयोजित किए गए। सभी सरकारी स्कूलों में इस अभियान के लिए विशेष प्रशिक्षण प्राप्त टीचर्स (मास्टर ट्रेनर्स) द्वारा बच्चों को ‘बैड टच’ का मुकाबला करते हुए खुद को सुरक्षित रखने के लिए ‘नो-गो-टेल’ की थ्योरी बताई गई। उन्होंने बताया कि तीसरे चरण के सफल आयोजन में 3 लाख 26 हजार 244 शिक्षकों के साथ ही 4 लाख 57 हजार 265 अभिभावकों और अन्य व्यक्तियों ने भी अपनी भागीदारी निभाई।

    शासन सचिव ने बताया कि प्रदेश में सुरक्षित स्कूल सुरक्षित राजस्थानअभियान का पहला चरण गत अगस्त माह में आयोजित किया गया था। दूसरा चरण और प्रथम रिपीटिशन अक्टूबर 2023 में आयोजित किया गया। आज तीसरे चरण एवं दूसरे रिपीटिशन के साथ ही स्कूल शिक्षा विभाग की विशेष पहल के तौर पर आयोजित इस कार्यक्रम का ‘चक्र’ (साइकल) पूर्ण हो गया है। उन्होंने बताया कि विशेषज्ञों का यह मानना है कि गुड टच और बैड टच के बारे में बच्चों को प्रथम बार प्रशिक्षण देने के बाद कुछ अंतराल के बाद उसके दो और रिपीटिशन किए जाते है, तो वे इसका सामना करते हुए खुद के बचाव में दक्ष हो जाते है। इसी उद्देश्य से स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा प्रदेश के स्कूलों में यह मुहिम चलाई गई।क्या है गुड टच और बैड टच में भेदशासन सचिव श्री जैन ने बताया कि टच किस इमोशन के साथ किया जा रहा है, इसकी पहचान ‘सिक्स्थ सेंस’ का इस्तेमाल करते हुए की जा सकती है।

    गुड टच और बैड टच में भेद करने की क्षमता भगवान ने सभी को प्रदान की है।

    ‘गुड टच’ से बच्चों में सुरक्षा और सुविधा (सेफ्टी और कम्फर्ट) तथा ‘बैड टच’ से असुरक्षा एवं असुविधा (इनसिक्योरिटी एवं डिस्कम्फर्ट) की फीलिंग आती है। उन्होंने बताया कि प्रदेश की स्कूलों में इन तीन चरणों में बच्चों को बैड टच की स्थिति में चिल्लाते हुए ‘नो’ बोलकर उस स्थान या व्यक्ति से सावधानी के साथ दूर भागने (गो) और इसके बारे में बिना किसी डर या घबराहट के किसी बड़े या जिस पर उनको सबसे ज्यादा भरोसा हो, को इसके बारे में बताने (टैल) की ‘नो-गो-टैल’ की थ्योरी की बारीकियां सिखाई गई।